📍 गोविंदगढ़, चौमूं, जयपुर (राजस्थान)संपर्क: 9461020260
मानवता की सेवा में समर्पित

सेवा ही सबसे बड़ा
धर्म है।

आइए, मिलकर जरूरतमंदों के जीवन में शिक्षा, सहयोग और आशा की नई रोशनी जगाएँ। आपका छोटा-सा सहयोग किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।

शिक्षाहर बच्चे तक सीखने के अवसर
मानव सेवाजरूरतमंदों के साथ संवेदना
पारदर्शिताविश्वास और जिम्मेदारी के साथ
हमारी पहचान

सेवा के भाव से, समाज के नाम

हमारा उद्देश्य केवल सहायता करना नहीं, बल्कि सम्मान, संवेदना और सहयोग के साथ एक बेहतर समाज का निर्माण करना है।

🤲
सेवा • समर्पण • परमार्थ

एक छोटा विचार, बदलाव की बड़ी राह

विधि परमार्थ सेवा ट्रस्ट की शुरुआत एक सरल विचार से हुई — यदि हम अपने जीवन का थोड़ा-सा हिस्सा दूसरों के दुख कम करने के लिए समर्पित कर दें, तो समाज और सुंदर बन सकता है।

“परमार्थ” का अर्थ है दूसरों के लिए जीना और “विधि” का अर्थ है विधान, व्यवस्था एवं न्याय। हमने इसी भावना को अपना ध्येय बनाया है कि सेवा सही तरीके से हो, सही हाथों तक पहुँचे और हर व्यक्ति के सम्मान को बनाए रखे।

निष्काम सेवामानवता सर्वोपरिपारदर्शितासामाजिक समर्पण
हमारे प्रयास

छोटे प्रयास, बड़ी खुशियाँ

आप सभी के सहयोग से ट्रस्ट ने शिक्षा और जरूरतमंद परिवारों की सहायता के लिए कुछ महत्वपूर्ण पहल की हैं।

📚

शिक्षा ही आधार है

सरकारी स्कूलों के बच्चों को 20 दर्जन नोटबुक वितरित कर शिक्षा के प्रति सहयोग का प्रयास किया गया। हमारा लक्ष्य है कि संसाधनों के अभाव में कोई बच्चा पढ़ाई से वंचित न रहे।

शिक्षा सहयोग अभियान
🧣

सर्दी में एक सहारा

15 जनवरी 2026 को पगड़ी नांगल गाँव में कड़ाके की ठंड को देखते हुए जरूरतमंद, गरीब और असहाय परिवारों को कंबल वितरित किए गए।

15 जनवरी 2026 • कंबल वितरण
❤️

मानवता सर्वोपरि

हमारा हर प्रयास जाति और धर्म से ऊपर उठकर केवल इंसानियत के लिए है। जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता और उसके सम्मान की रक्षा हमारा संकल्प है।

सबके लिए सेवा
हमारा संकल्प

सचिव की कलम से

सेवा, विश्वास और जिम्मेदारी के भाव के साथ — ट्रस्ट परिवार की ओर से।

जय श्री राम,

मैं जयसिंह बराला, सचिव — विधि परमार्थ सेवा ट्रस्ट, गोविंदगढ़, चौमूं (जयपुर)।

आज जब मैं अपनी कलम उठा रहा हूँ तो मन में एक ही भाव है — सेवा।

“परमार्थ ही जीवन का असली अर्थ है।”

विधि परमार्थ सेवा ट्रस्ट की शुरुआत किसी बड़े महल या योजना से नहीं हुई। इसकी शुरुआत हुई एक छोटे-से विचार से — कि अगर हम अपने जीवन में थोड़ा-सा हिस्सा दूसरों के दुख को कम करने के लिए निकाल दें, तो यह समाज कितना सुंदर बन सकता है।

“परमार्थ” शब्द का अर्थ ही है — दूसरों के लिए जीना। और “विधि” का अर्थ है — विधान, व्यवस्था, न्याय। हमने इसी भाव को अपना ध्येय बनाया कि सेवा भी विधि-विधान से हो, सही हाथों तक पहुँचे और उसका सम्मान बना रहे।

मेरे लिए ट्रस्ट क्या है?

मेरे लिए यह ट्रस्ट कोई संस्था नहीं, एक परिवार है। आप सभी दानदाता, सहयोगी, युवा साथी और बुजुर्गों का आशीर्वाद ही इसकी असली पूँजी है। सचिव के रूप में मेरी जिम्मेदारी बड़ी है — आपके द्वारा दिए गए एक-एक रुपये का हिसाब और उसकी पवित्रता बनाए रखना।

मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि ट्रस्ट का हर कार्य पारदर्शिता के साथ, जमीन पर किया जाएगा। फोटो के लिए नहीं, फर्ज के लिए।

आने वाली राह — हमारा सपना

  • हर जरूरतमंद बच्चे के लिए शिक्षा सामग्री की व्यवस्था।
  • बेटियों के लिए सिलाई-कढ़ाई व कौशल केंद्र।
  • रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य जांच शिविर और नशा मुक्ति जागरूकता।
  • पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण अभियान।

यह सब अकेले जयसिंह बराला नहीं कर सकता। यह हम सब मिलकर करेंगे।

“पवित्र मन दुनिया का सबसे बड़ा तीर्थ है, और दीन-दुखियों की सेवा प्रभु के सबसे सुंदर दर्शन हैं।”

आपका साथ रहा तो सेवा की यह ज्योति यूँ ही जलती रहेगी।

आपका अपना,
जयसिंह बराला
सचिव / संचालक
विधि परमार्थ सेवा ट्रस्ट, गोविंदगढ़ (जयपुर)

हमारा लक्ष्य

आने वाले कल के लिए संकल्प

आपके सहयोग से हम सेवा के इन प्रयासों को और आगे बढ़ाना चाहते हैं।

📖

शिक्षा सामग्री

जरूरतमंद बच्चों को कॉपी, किताबें और आवश्यक सामग्री।

🧵

कौशल विकास

बेटियों के लिए सिलाई-कढ़ाई एवं कौशल केंद्र।

🩸

स्वास्थ्य एवं जागरूकता

रक्तदान, स्वास्थ्य जांच और नशा मुक्ति अभियान।

🌱

पर्यावरण संरक्षण

पौधारोपण और हरित वातावरण के लिए पहल।

हमसे जुड़ें

संपर्क करें

सेवा के इस परिवार का हिस्सा बनें। सुझाव, सहयोग या जानकारी के लिए हमसे संपर्क करें।

📍

ट्रस्ट का पता

गोविंदगढ़, चौमूं, जयपुर, राजस्थान

📞

मोबाइल नंबर

9461020260